कोरोना परास्त होगा,देश विजयी एवं सशक्त होगा-सीताराम गुप्ता।

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कोरोना परास्त होगा,देश विजयी एवं सशक्त होगा-सीताराम गुप्ता।

Corona will be defeated, the country will be victorious and strong - Sitaram Gupta.
सीताराम गुप्ता।


भारत में लाॅकडाउन का प्रथम चरण पूर्ण हो चुका है,इस समय हम विचार करे कि हमने क्या किया,इस लाॅकडाउन से कोरोना वायरस महामारी से क्या लडना सीखा और देश व समाज के लिए आगे का रास्ता क्या है।

यह सत्य है कि कुछ सीख हमें अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से लेनी पडेगी,हमारे देष के विभिन्न राज्यों,यहां तक कि बहुत से जिलों ने बहुत अच्छा कार्य किया,उनसे भी प्रेरणा लेनी पडेगी। क्षेत्र विषेष ने भी अपने माॅडल भी इस महामारी से लडने के लिए हमारे सामने दिए है। इन सबको सामने रखकर आगे का आदर्श मार्ग क्या हो सकता है,हम विचार करे।

अगर दूसरे देषों की बात करे,तो सबसे पहले हमें चीन (जहां से इस महामारी का जन्म हुआ है ) के पास ताईवान से सीखना पडेगा,क्यों कि चीन बहुत पास होते हुए भी वहां कोरोना क्यों महामारी का केन्द्र नही बना।

जापान,कोरिया,स्वीडन कुछ ऐसे देष है वहां पर इस महामारी का हाहा कार नही मचा। स्वीडन में तो सारे कार्य विधिवत होते रहे है। ज्ञकूल खुले है,रैस्त्रा भी खुले रहे,आम जीवन सामान्य रहा,बस एक पाबन्दी कि पचास से ज्यादा लोग एक साथ एकत्रित नही होगे। दूसरी तरफ गैर अनुषासन वाले देष अमेरिका,इटली,स्पेन,यूके तथा फ्रांस के तबाही के मन्जर के उदारहण भी हमारे सामने है। इस बारे में ज्यादा लिखने व बताने की जरूरत नही है। क्योकि इन देषों के बारे में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। हमारे देष में केरल राज्य का उदाहरण सर्वोपरि है।

जो राज्य कोरोना के मरीजों के मामले में महाराष्ट्र के बाद दूसरे नम्बर पर था आज वह पहले दस राज्यों की सूची से बहार है। उत्तरप्रदेष आबादी के हिसाब से संसार में पांचवा तथा भारत में पहला हो सकता है। वहां हाॅस्टस्टाॅप को चिन्हित एवं सील करके शानदार काम किया है।

राजस्थान राज्य लाॅकडाउन लगाने वाला राज्य था,वह भी सीमित संसाधनों से इस महामारी का सफलता पूर्वक मुकाबला कर रहा है। दूसरे राज्य कर्नाटक,पंजाब,तेलंगाना आदि ने इस सदी की स्वास्थ्य की त्रासदी को अपने-अपने ढंग से लडने का संकल्प दोहराया है। अतिष्योक्ति नही होगी िक इस महान देष के राज्यों ने जिस दृढता,संयम,कर्तव्यबोध,पारस्परिक सहयोग और इच्छा षक्ति के इस संकट घडी में धैर्य पूर्वक कार्य किया है। वह देष की संघीय ढांचे की मजबूती को बयान करता है। इस महामारी का सबसे बडा और कारगर हथियार जो निकल कर आ रहा है,वह है सोशल डिस्टेंसिंग(तन-दूरी) इस लिए जब तक किसी टंबबपदम का इजाद नही होता है,तब तक तन-दूरी ही इस महामारी से लडने की सबसे मुफीद वैक्सीन है। हमें हर कीमत पर इसका पालन करना होगा। लडाई लम्बी है। अतः जागरूकता क्रियान्विती तथा जिम्मेदाराना व्यवहार बहुत आवष्यक है। इस सृष्टि को चलाने के लिए ईश्वर ने त्रिमूर्ति का निर्माण किया है वह त्रिमूर्ति है ब्रह्म,विष्णु,महेष है। इसी प्रकार देष को चलाने के लिए पहले लेख में मैने त्रिमूर्ति का उल्लेख किया था,वह है सरकार,समाज तथा सिविल सोसायटी। यह तीनों ही कंधे से कंधा मिलाकर काम करे तो इस जंग पर हम विजय प्राप्त कर सकते है। क्रियान्विती-सरकार,जिम्मेदाराना व्यवहार-समाज,जागरूकता-सिविल सोसायटी,समाज के दानदाता,गरीब,बेसहारा,असहाय,दिहाडी मजदूरों को भोजन रूपी दान देकर इस घडी में अपना कर्तव्य निभा सकते है तथा उन्होने बखूबी निभाया भी है।

इसके देशव्यापी ढेरो उदाहरण हमारे सामने है। हमारे देष में सरकार की जिले स्तर पर त्रिमूर्ति जिल कलक्टर,पुलिस अधीक्षक तथा सीएम एण्ड एचओ है। इस तरह की त्रिमूर्ति का उदाहरण अन्य देशों में नही मिलता है।

यह हमारा बाढ,सूखा,आपदा एवं महामारी में लडने वाला त्रिमूर्ति माॅडल है। यह त्रिमूर्ति ही इस महामारी से जीतने का सेतु का काम कर सकती है यह SETU gS& S Supervision¼Collector½Tracking ]E-Enforcement(SP)Tracing]T-Treatment(CM&HO)Testing]U- Unity इन तीनों की , हम विचार करें कि इस सेतु को इन 3 पर तव्रित कार्य करना होगा। अगर सरकारी स्तर पर यह तीनों मिलकर कार्य करते है तो अपेक्षित परिणाम आना निष्चित है। मैं फिर दोहराना चाहाता हूॅ कि वर्तमान में देश के सामने बहुत बडा क्राइसिस है। इस क्राइसिस से लडने के लिए इस उपरोक्त त्रिमूर्ति को क्राइसिस से क्राइसिस को ही मात देनी होगी। यह क्राइसिस है- C-courage R-Resourcefulness I-Initiative S-Sensitivity I-Innovation S-Speed अगर उपरोक्त 6 चीजे इस त्रिमूर्ति के पास है तो कोई ताकत नही जो इस महामारी को मात देने से हमे रोक सके।

अतः हौंसला,धैर्य, आनुषासन,एहतियात,सतर्कता,सयम यह वह शक्तिशाली शब्द है जिनसे हम इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकते है। दो चीजे स्पष्ट रूप से हमारे देश के अनुकूल है वह है गर्मी का आना तथ दूसरी हमारा युवा देष होना। देष की 65 प्रतिषत आबादी 35 साल आयु वालों की है। अतः यह दोनो अनुकूलत ईष्वर ने हमें प्रदान की है ईष्वर तथा प्रकृति में आस्था,खुद मं विष्वास,अनेकता में एकता,हमारा मानवीय गुण हमको अवश्य विजय दिलाऐगा। अब समय आ गया है कि हमें अब दूसरे चरण के लाॅकडाउन में जीवन तथा जीविका पर एक साथ कार्य करना होगा। असाधारण परिस्थिति में असाधारण कर्म,असाधरण बुद्विमता एवं असाधारण धैर्य का परिचय देना होगा। अगर उपरोक्तों को हम सुनिष्चित कर सकते है तो मै विष्वास के साथ कह सकता हूॅ कि विजयश्री हमारा इन्तजार कर रही है और यही विजयश्री हमारे देश के पुननिर्माण का रास्ता तय करेगी।

लेखक सीताराम गुप्ता

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