Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

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Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी
Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी
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Top 10 Hindi News : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत माता की महान संतानों में एक, साहस, करुणा तथा सुशासन के प्रतिमान असाधारण छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनका जीवन लाखों लोगों को प्रेरित करता है। ’शिवाजी महाराज ने शौर्यपूर्ण योद्धा और महान प्रशासक के रूप में अपनी छवि बनाई। मजबूत नौसेना बनाने से लेकर अनेक जनमुखी नीतियां लागू करने के साथ वह सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट थे। उन्हें अन्याय और धमकी का प्रतिकार करने के लिए हमेशा जाना जाएगा।महान छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या जयंती दिनी त्यांना नमन!

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Bowing to one of the greatest sons of Mother India, the embodiment of courage, compassion and good governance, the exceptional Chhatrapati Shivaji Maharaj on his Jayanti. His life continues to motivate millions. — Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2020Chhatrapati Shivaji Maharaj made a mark as a valorous warrior and an outstanding administrator. From building a strong navy to ushering several pro-people policies, he was outstanding in all spheres. He will always be remembered for his opposition to injustice and intimidation.— Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2020

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Top 12 Hindi News: नितिन गडकरी ने गोथेनबर्ग, स्वीडन में उच्च दक्षता लॉजिस्टिक वाहनों का अवलोकन किया

Top 12Hindi News: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और एमएसएमई  मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज स्वीडन के गोथेनबर्ग में स्वीडिश लॉजिस्टिक ऑटोमोटिव निर्माता ‘वोल्वो’ का दौरा किया। उन्होंने उच्च दक्षता वाले लॉजिस्टिक वाहनों (सड़क-ट्रेन), एलएनजी ट्रकों, इलेक्ट्रिक ट्रकों आदि का अवलोकन किया।

वोल्वो हैवी-ड्यूटी ट्रकों, निर्माण उपकरणों, बसों और हैवी-ड्यूटी डीजल इंजनों के साथ-साथ समुद्रीय और औद्योगिकीय इंजनों का एक सबसे बड़ा विनिर्माता है। श्री गडकरी के साथ भारत में स्वीडन के राजदूत श्री क्लास मोलिन भी थे।

 Top 10 Hindi News:  नितिन गडकरी ने गोथेनबर्ग, स्वीडन में उच्च दक्षता लॉजिस्टिक वाहनों का अवलोकन किया
Top 10 Hindi News: नितिन गडकरी ने गोथेनबर्ग, स्वीडन में उच्च दक्षता लॉजिस्टिक वाहनों का अवलोकन किया

श्री गडकरी 19 और 20 फरवरी, 2020 के दौरान स्टॉकहोम में आयोजित किये जा रहे ‘वैश्विक लक्ष्य 2030 को अर्जित करने के लिए सड़क सुरक्षा पर तीसरे उच्च स्तरीय वैश्विक सम्मेलन’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए इन दिनों स्वीडन में हैं। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को वैश्विक एजेंडे पर लाना और सुरक्षित सड़कों के लिए विश्व समुदाय की प्रतिबद्धता का नवीनीकरण करना है। प्रतिभागी देशों के नेता वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिये ‘यूएन डिकेड ऑफ एक्शन’ के तहत निर्धारित   संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए रोड-मैप तैयार करेंगे।

स्टॉकहोम में अपने प्रवास के दौरान, श्री गडकरी स्वीडन के बुनियादी ढांचा मंत्री टॉम्स एनरॉथ, विदेश व्यापार मंत्री श्री अन्ना हॉलबर्ग, व्यापार, उद्योग एवं नवाचार मंत्री श्री इब्राहिम बेलान तथा ब्रिटेन के सड़क सुरक्षा मंत्री बैरोनेस वेरी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। श्री गडकरी विश्व बैंक के उपाध्यक्ष (दक्षिण एशिया) हार्ट शेफर के साथ भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा श्री गडकरी की यात्रा में स्वीडन-भारत परिवहन सुरक्षा एवं नवाचार भागीदारी की बैठक भी शामिल है जिसमें अनेक सीईओ शामिल होंगे। इस अवसर पर स्वीडन और भारत के  व्यवसायों में अनेक समझौता ज्ञापनों(एमओयू) का आदान-प्रदान होने की संभावना है।

Top 11 Hindi News: भारतीय नौसेना ने जहाजों तथा पनडुब्बियों की रीफिट तथा अवसंरचना तैयारियों की समीक्षा की

भारतीय नौसेना ने जहाजों तथा पनडुब्बियों की रीफिट तथा अवसंरचना तैयारियों की समीक्षा की
Top 10 Hindi News:भारतीय नौसेना ने जहाजों तथा पनडुब्बियों की रीफिट तथा अवसंरचना तैयारियों की समीक्षा की

Top 11 Hindi News: भारतीय नौसेना का वार्षिक रीफिट सम्मेलन (एआरसी) तथा वार्षिक अवसंरचना सम्मेलन (एआईसी) 18 फरवरी, 2020 को पूर्वी नौसेना कमान विशाखापत्तनम मुख्यालय में प्रारंभ हुआ। दो दिन के सम्मेलन की अध्यक्षता वाइस एडमिरल जी.एस. पब्बी, एवीएसएम, वीएसएम चीफ ऑफ मेटेरियल (सीओएम) एकीकृत मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय (नौसेना) ने की। सम्मेलन में नौसेना मुख्यालय, नौसेना के तीनों कमान, तीनों सेनाओं की अंडमान तथा निकोबार कमान, पोर्ट ब्लेयर, डॉकयार्ड, मरम्मत यार्ड तथा नौसेना के मेटेरियल संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधि भारतीय नौसेना के सभी जहाजों और पनडुब्बियों को रीफिट करने (फिर से दुरुस्त करने) की योजनाओं पर चर्चा करेंगे और भारतीय नौसेना की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अवसंरचना को मजबूत बनाने की योजना तैयार करेंगे।

अपने उद्घाटन भाषण में वाइस एडमिरल अतुल कुमार जैन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, ईएनसी ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और नौसेना प्लेटफॉर्मों की युद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में किए जा रहे समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने समुद्र में प्लेटफॉर्मों के सतत संचालन की दिशा में नौसेना रिपेयर यार्ड की भूमिका की सराहना की।

चीफ ऑफ मेटेरियल (सीओएम) ने अपने संबोधन में कर्मियों तथा सामग्री की सुरक्षा पर फोकस के साथ जहाजों तथा पनडुब्बियों को रीफिट करने की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस आयोजन की सराहना की। सम्मेलन में बढ़ी हुई सक्षमता/समुद्री इकाईयों की क्षमता पर विशेष बल के साथ व्यापक रूप से रीफिट से संबंधित तकनीकी तथा लॉजिस्टिक पहलुओं पर विचार किया गया। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की भावना के साथ अधिक से अधिक स्वदेशीकरण पर फोकस करने का आग्रह किया।

वार्षिक अवसंरचना सम्मेलन 19 फरवरी, 2020 को होगा, जिसमें आधुनिकीकरण तथा मरम्मत मजबूती और रीफिटिंग अवसंरचना में प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि भारतीय नौसेना के हथियारों की घातक बढ़त बनाई रखी जा सके।

Top 10 Hindi News: श्री अर्जुन मुंडा ने एनसीएसटी के 16वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया

Top 10Hindi News : केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के 16वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया। समारोह का आयोजन राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने किया था। उन्होंने इस अवसर पर प्रमुख भाषण दिया। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरूता सम्मानित अतिथि थी। इस अवसर पर एनसीएसटी के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साई तथा आयोग के सदस्य और अन्य अतिथि उपस्थित थे।

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श्री अर्जुन मुंडा ने देश में अनुसूचित जनजाति की उदाहरणीय सेवा के लिए (1.) सीपीएसयू-वेस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड, नागपुर (सीएमडी श्री राजीव रंजन मेहरा ने पुरस्कार प्राप्त किया) तथा (2.) व्यक्तिगत (श्री अजय कुमार जायसवाल सचिव, आशा, रांची ने पुरस्कार प्राप्त किया) पुरस्कार दिए।

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अपने प्रमुख भाषण में श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि संविधान में 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से अनुच्छेद 338 में संशोधन से नया अनुच्छेद 338ए जोड़कर 19 फरवरी, 2004 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की गई। 89वें संशोधन में अन्य बातों के साथ-साथ आयोग का दायित्व संविधान, कोई वर्तमान अन्य कानून या सरकार के किसी आदेश के अंतर्गत अनुसूचित जनजातीयों को दिए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों को लागू करने की देख-रेख करना है।

श्री मुंडा ने कहा कि आयोग का गठन देश में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के महान उद्देश्य के लिए किया गया था। उन्होंने मत जाहिर किया कि देश में जनजातीय भूमि का डेटा बैंक होना चाहिए। एनसीएसटी की उचित अनुसंधान कार्य के लिए एक स्वतंत्र अनुसंधान टीम होनी चाहिए। आयोग की एक उचित डाटा प्रबंधन प्रणाली भी होनी चाहिए। उन्होंने एनसीएसटी के सशक्तिकरण में जनजातिय मामलों के मंत्रालय के पूरे सहयोग और समर्थन का आश्वासन दिया। श्री नंद कुमार साई ने अपने संबोधन में देश में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के एनसीएसटी की विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी।

श्रीमती रेणुका सिंह सरूता ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1999 में अलग से जनजातिय मामलों के मंत्रालय का गठन किया था। बाद में 19 फरवरी 2004 को अलग राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का सृजन किया गया। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग है। लेकिन अनेक राज्यों में ऐसे आयोग गठित नहीं किये गये हैं। सभी राज्यों में अनुसूचित जनजाति आयोग होने चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीये लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में काफी योगदान दिया है।

आयोग में एक चेयरपर्सन एक उपाध्यक्ष तीन पूर्णकालिक सदस्य (एक महिला सदस्य सहित) होते हैं। चेयरपर्सन और उपाध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल कार्यभार संभालने की तिथि से तीन वर्ष का होता है। चेयरपर्सन को कैबिनेट मंत्री का, उपाध्यक्ष को राज्य मंत्री का तथा अन्य सदस्यों को भारत सरकार के सचिव का रैंक प्रदान किया गया है।

अनुच्छेद 338 A के खंड (5) के तहत भारत के संविधान ने आयोग को निम्नलिखित कर्तव्य और कार्य सौंपे हैं:

  • संविधान के तहत या किसी अन्य कानून के तहत या सरकार के किसी आदेश के तहत अनुसूची जनजातियों को प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और निगरानी करना तथा ऐसे सुरक्षा उपायों के काम का मूल्यांकन करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने के संबंध में विशिष्ट शिकायतों की जांच करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना तथा केंद्र या किसी अन्य राज्य के तहत उनकी प्रगति का मूल्यांकन करना।
  • राष्ट्रपति को  वार्षिंक या अन्य ऐसे अवसरों पर जिन्हें आयोग उचित समझे और ऐसे सुरक्षा उपायों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
  • ऐसी रिपोर्ट में उपायों की सिफारिशें करना जो इन सुरक्षा उपायों के प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र या किसी राज्य द्वारा की जाये इसेक अलावा  चाहिए और अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अन्य उपायों की भी सिफारिश करना।
  • अनुसूचित जनजातियों की सुरक्षा, कल्याण एवं विकास और उन्नति के संबंध में ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना, जो संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानूनी प्रावधानों के अधीन हो सकते हैं।

Top 9 Hindi News : प्रधानमंत्री ‘हुनर हाट’ देखने पहुंचे

Top 9 Hindi News : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आज नई दिल्ली के इंडिया गेट लॉन में आयोजित ‘हुनर हाट’ को देखने गए। उन्होंने हुनर हाट में देशभर से भाग ले रहे उस्ताद शिल्पकारों, दस्तकारों तथा व्यंजन विशेषज्ञों के स्टॉल देखे। इंडिया गेट लॉन में 250 से अधिक ऐसे स्टॉल लगाए गए हैं। हुनर हाट में भाग ले रहे शिल्पकारों में 50 प्रतिशत से अधिक महिला शिल्पकार हैं। प्रधानमंत्री ने दस्ताकारों के साथ बातचीत की और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखा।

हुनर हाट रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सरकार के संकल्प के साथ-साथ भारत की स्वदेशी परम्पराओं के संरक्षण और प्रोत्साहन को दिखाता है। इनमें से कई परम्पराएं विलुप्त हो रही हैं।

इस वर्ष के हुनर हाट का विषय ‘कौशल को काम’ है। पिछले तीन वर्षों में हुनर हाट के माध्यम से लगभग 3 लाख उस्ताद शिल्पकारों, दस्तकारों और व्यंजन विशेषज्ञों को रोजगार और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए है। लाभार्थियों में बड़ी संख्या में महिला शिल्पकार शामिल हैं।

Top 8Hindi News : मंत्रिमंडल ने अधिकार प्राप्त ‘प्रौद्योगिकी समूह’ के गठन की मंजूरी दी

Top 8 Hindi News : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अधिकार प्राप्त ‘प्रौद्योगिकी समूह’ के गठन की मंजूरी दी है।

विवरणः

मंत्रिमंडल ने भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में 12 सदस्य वाले प्रौद्योगिकी समूह के गठन को मंजूरी दी है। इस समूह को नवीनतम प्रौद्योगिकियों के बारे में समय पर नीतिगत सलाह देना, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी उत्पादों की मैपिंग करना, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और सरकारी अनुसंधान एवं विकास संगठनों में विकसित प्रौद्योगिकियों के दोहरे उपयोग का वाणिज्यीकरण, चुनिंदा प्रमुख प्रौद्योगिकियों के लिए स्वदेशी रोड मैप विकसित करना और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए उचित अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों का चयन करने का अधिकार प्राप्त है।

प्रमुख प्रभावः

यह प्रौद्योगिकी समूह निम्न कार्य करेगा-

  • (ए) प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता के लिए विकसित की जाने वाली प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी खरीददारी रणनीति पर संभावित सर्वश्रेष्ठ सलाह देना
  • बी) नीतिगत पहलों और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के उपयोग के बारे में इन-हाउस विशेषज्ञता विकसित करना।
  • सी) सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संगठनों में विकसित/विकसित की जा रही सार्वजनिक क्षेत्र प्रौद्योगिकी की निरंतरता सुनिश्चित करना।

Top 10 Hindi News: कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य

इस प्रौद्योगिकी समूह के कार्य के तीन स्तंभ  इस प्रकार हैं-

  • पूंजीगत सहायता,
  • खरीदारी सहायता और
  • अनुसंधान एवं विकास प्रस्ताव पर मदद करना।

प्रौद्योगिकी समूह निम्नलिखित कार्य सुनिश्चित करेगाः-

  • कि भारत के पास आर्थिक विकास और सभी क्षेत्रों में भारतीय उद्योग के सतत विकास के लिए नवीनतम तकनीकों के प्रभावी, सुरक्षित और संदर्भ के हिसाब से उपयोग के लिए आवश्यक नीतियां और रणनीतियां हों।  
  • प्राथमिकताओं के आधार पर सरकार को सलाह देना और सभी क्षेत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान की रणनीतियां बनाना।
  • पूरे भारत में प्रौद्योगिकियों के अद्यतन नक्शे, इसके मौजूदा उत्पादों और विकसित की जा रही तकनीकों का रखरखाव करना।
  • चयनित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए स्वदेशीकरण रोडमैप विकसित करना।
  • सरकार को इसके प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ता और खरीद रणनीति पर सलाह देना।
  • सभी मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ राज्य सरकारों को विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल और नीति पर विशेषज्ञता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना। इसके लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को विकसित करने पर भी जोर देना।
  • विश्वविद्यालयों और निजी कंपनियों के साथ मिलकर सभी क्षेत्रों में सहयोग और अनुसंधान को प्रोत्साहित करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों/प्रयोगशालाओं में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रौद्योगिकी की स्थिरता के लिए नीतियां बनाना।
  • अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रस्तावों के पुनरीक्षण में लागू होने वाली सामान्य शब्दावली और मानक तैयार करना।

Top 10 Hindi News: पृष्ठभूमि

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पांच महत्वपूर्ण मुद्दे: (क) प्रौद्योगिकी के विकास के लिए साइलो-केंद्रित दृष्टिकोण। (ख) प्रौद्योगिकी मानक विकसित या लागू नहीं किए जाने से उच्च मानक से कम औद्योगिक विकास। (ग) दोहरे उपयोग प्रौद्योगिकियों का पूरी तरह व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होना। (घ) अनुसंधान और विकास कार्यक्रम जिनका प्रौद्योगिकी विकास में पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया। (ङ) समाज और उद्योग में अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के मानचित्रण की जरूरत। प्रौद्योगिकी समूह का गठन उपरोक्त समस्याओं को दूर करने का एक प्रयास है।

Top 7 Hindi News : मंत्रिमंडल ने फसल बीमा योजना लागू करने में वर्तमान चुनौतियों के समाधान के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)’ तथा ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस)’ को नया रूप देने को मंजूरी दी

Top 10 Hindi News :प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)’ तथा ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस)’ को नया रूप देने की मंजूरी दी है।

Top 7 Hindi News :

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने फसल बीमा योजना लागू करने में वर्तमान चुनौतियों के समाधान के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)’ तथा ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस)’ को नया रूप देने की मंजूरी दी है।

जारी पीएमएफबीवाई तथा आरडब्ल्यूबीसीआईएस के कुछ मानकों/प्रावधानों में संशोधन का निम्नलिखित प्रस्ताव है।

  • ए.) बीमा कम्पनियों को व्यवसाय का आवंटन तीन वर्षों के लिए किया जाएगा (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)।
  • बी.)  राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को वित्त का आकार या सांकेतिक औसत पैदावार का जिला स्तरीय मूल्य (एनएवाई) यानी एनएवाई* किसी भी जिले के फसल मिश्रण (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों) के लिए बीमित राशि के रूप में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को चुनने का विकल्प दिया जाएगा। अन्य फसलों के लिए फसल के खेत मूल्य पर विचार किया जाएगा, जिनका न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं किया गया है।
  • डी.) योजना लागू करने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए लचीलापन होगा और उनके पास प्रतिबंधित बुआई, स्थानीय आपदा, मध्य सीजन में विपरीत परिस्थिति तथा फसल कटाई के बाद के नुकसानों जैसे अतिरिक्त जोखिम कवर/विशेषताओं में से कोई एक या अनेक चुनने का विकल्प होगा। राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश ओला-वृष्टि आदि जैसे विशिष्ट एकल जोखिम/बीमा कवर की पेशकश पीएमएफबीवाई के अंतर्गत बेस कवर के साथ और बेस कवर के बिना दोनों स्थितियों में कर सकते है। (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)
  • ई.) राज्यों द्वारा संबंधित बीमा कम्पनियों को निर्धारित समयसीमा से आगे प्रीमियम सब्सिडी में विलंब करने की स्थिति में राज्यों को बाद के सीजन में योजना को लागू करने की अनुमति नहीं दी जाएगा। खरीफ तथा रबी सीजन के लिए इस प्रावधान को लागू करने की कटऑफ तिथि क्रमिक वर्षों में क्रमशः 31 मार्च और 30 सितंबर होगी। (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)
  • एफ.) फसल नुकसान/अनुमति योग्यदावों के आकलन के लिए दो चरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह प्रक्रिया परिभाषित अंतर मैट्रिक्स पर आधारित होगी और इसमें मौसम संकेतकों, सेटेलाइट संकेतकों आदि का इस्तेमाल प्रत्येक क्षेत्र के लिए सामान्य सीमा तथा अंतर सीमाओं के साथ किया जाएगा। पैदावार नुकसान निर्धारण के लिए (पीएमएफबीवाई) केवल अंतर वाले क्षेत्र ही फसल कटाई प्रयोगों (सीसीई) के अधीन होंगे।
  • जी.) सीसीई संचालन में स्मार्ट सैंपलिंग टेक्निक (एसएसटी) तथा सीसीई की संख्या के अधिकतम उपयोग को अपनाया जाएगा। (पीएमएफबीवाई)
  • एच.) योजना लागू करने वाली बीमा कम्पनियों के लिए राज्यों द्वारा कटऑफ तिथि से आगे पैदावार डाटा का प्रावधान नहीं करने की स्थिति में टेक्नोलॉजी समाधान के उपयोग के माध्यम से निश्चित पैदावार के आधार पर दावे निपटाए जाएंगे।
  • आई.) योजना के अंतर्गत नामांकन सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाया जाएगा। (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)
  • जे.) प्रीमियम सब्सिडी में केन्द्रीय हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वर्तमान 50:50 की साझा व्यवस्था से बढ़ाकर 90 प्रतिशत किया जाएगा। (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)
  • के.) प्रशासनिक खर्चों के लिए योजना की कुल आवंटन का कम से कम 3 प्रतिशत का प्रावधान भारत सरकार तथा योजना लागू करने वाली राज्य सरकार करेगी। यह प्रत्येक राज्य के लिए डीएसी एंड एफडब्ल्यू द्वारा निर्धारित ऊपरी सीमा के अधीन होगा। (पीएमएफबीवाई/आरडब्ल्यूबीसीआईएस दोनों)
  • एल.) उपरोक्त के अतिरिक्त कृषि, सहकारिता तथा किसान कल्याण विभाग अन्य हितधारकों/एजेंसियों की सलाह से राज्य विशेष, वैकल्पिक जोखिम समाप्ति कार्यक्रम तैयार करेंगे/विकसित करेंगे। योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है इसलिए वित्तीय समर्थन तथा कारगर जोखिम समाप्ति उपाए फसल बीमा के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे, विशेषकर 151 जिलों को, जो काफी अधिक जल की कमी से दबाव में है। इनमें 29 जिलों पर किसानों की कम आय तथा सूखा के कारण दोहरा प्रभाव पड़ा। इसलिए इस संबंध में एक अलग योजना तैयार की जाएगी।
  • एम.) योजना के संबंधित प्रावधानों/मानकों तथा पीएमएफबीवाई तथा  आरडब्ल्यूबीसीआईएस के संचालन दिशा-निर्देश को संशोधित करके उपरोक्त संशोधनों को शामिल किया जाएगा और इन्हें खरीफ 2020 सीजन से लागू किया जाएगा।

लाभः

आशा है कि इन परिवर्तनों से किसान बेहतर तरीके से कृषि उत्पादन में जोखिम प्रबंधन करने में सक्षम होंगे और कृषि आय को स्थिर बनाने में सफल होंगे। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में कवरेज बढ़ेगा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसान बेहतर तरीके से कृषि जोखिम प्रबंधन में सक्षम होंगे। परिवर्तन त्वरित और सटीक पैदावार आंकलन को सक्षम बनाएंगे, जिससे दावों का निपटान तेजी से होगा।

इन परिवर्तनों को पूरे देश में खरीफ 2020 सीजन से लागू करने का प्रस्ताव है।

Top 6 Hindi News : मंत्रिमंडल ने 3 वर्ष की अवधि के लिए 22वें भारतीय विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी  

Top 6 Hindi News :

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकारी राजपत्र में गठन के आदेश के प्रकाशन की तिथि से 3 वर्ष की अवधि के लिए 22वें भारतीय विधि आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है।

लाभः

सरकार को विचारणीय विषयों के अनुसार अध्ययन और सिफारिश के लिए आयोग को सौंपे गये कानून के विभिन्न पहलुओं के बारे में एक विशेषज्ञता प्राप्त निकाय से सिफारिशें मिलने का लाभ प्राप्त होगा।

विधि आयोग केंद्र सरकार द्वारा इसे सौंपे गये या स्वतः संज्ञान पर कानून में अनुसंधान करने और उसके बारे में सुधार करने के लिए भारत के मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने तथा नए कानून बनाने का काम करेगा। यह प्रक्रियाओं में देरी को समाप्त करने, मामलों को तेजी से निपटाने, अभियोग की लागत कम करने के लिए न्याय आपूर्ति प्रणालियों में सुधार लाने के लिए अध्ययन और अनुसंधान भी करेगा।  

भारतीय विधि आयोग निम्न कार्य करेगा

  • (ए) यह ऐसे कानूनों की पहचान करेगा जिनकी अब कोई जरूरत नही है या वे अप्रासंगिक है और जिन्हें तुरन्त निरस्त किया जा सकता है।
  • (बी) राज्य नीति के आलोक में मौजूदा कानूनों की जांच करना तथा सुधार के तरीकों के सुझाव देना और नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनों के बारे में सुझाव देना तथा संविधान की प्रस्तावना में निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करना।
  • (सी) कानून और न्यायिक प्रशासन से संबंधित उस किसी भी विषय पर विचार करना और सरकार को अपने विचारों से अवगत कराना, जो इसे विधि और न्याय मंत्रालय (कानूनी मामलों के विभाग) के माध्यम से सरकार द्वारा विशेष रूप से अग्रेषित किया गया है।
  • (डी) विधि और न्याय मंत्रालय (कानूनी मामलों के विभाग) के माध्यम से सरकार द्वारा अग्रेषित किसी बाहरी देश को अनुसंधान उपलब्ध कराने के अनुरोध पर विचार करना।
  • (इ) गरीब लोगों की सेवा में कानून और कानूनी प्रक्रिया का उपयोग करने के लिए आवश्यक हो गये सभी उपाय करना।
  • (एफ) सामान्य महत्व के केंद्रीय अधिनियमों को संशोधित करना ताकि उन्हें सरल बनाया जा सके और विसंगतियों, संदिग्धताओं और असमानताओं को दूर किया जा सके।

अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले आयोग नोडल मंत्रालय/विभागों तथा ऐसे अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करेगा जिन्हें आयोग इस उद्देश्य के लिए आवश्यक समझे।

पृष्ठभूमिः

भारतीय विधि आयोग, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर गठित एक गैर-सांविधिक निकाय है। आयोग का मूल रूप से 1955 में गठन किया गया था और इसका प्रत्येक 3 साल के लिए पुनर्गठन किया जाता है। 21वें भारतीय विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 तक था।  

विभिन्न विधि आयोग प्रगतिशील विकास और देश के कानून के संहिताकरण के बारे में महत्वपूर्ण योगदान देने में समर्थ रहे हैं। विधि आयोग ने अभी तक 277 रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं।

22वां विधि आयोग सरकारी राजपत्र में गठन के आदेश के प्रकाशन की तिथि से 3 वर्ष की अवधि के लिए गठित किया जायेगा। इसमें निम्मलिखित शामिल होंगे‑

  • ए) एक पूर्णकालिक अध्यक्ष,
  • बी) चार पूर्णकालिक सदस्य (सदस्य सचिव सहित),
  • सी) सचिव, कानूनी मामलों का विभाग, पदेन सदस्य के रूप में,  
  • डी) सचिव, विधायी विभाग पदेन सदस्य के रूप में, और  
  • इ) अधिक से अधिक पांच अंशकालिक सदस्य

Top 5 HindiNews: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया

Top 5 Hindi News : श्री जावड़ेकर ने प्रकाशन का ई-संस्करण भी जारी किया। ई-संस्करण टैबलेट, कम्प्यूटरों, ई-रीडर्स तथा स्मार्ट फोन पर एक्सेस किया जा सकता है। ई-बुक तकनीकी रूप से श्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है और प्रिंट संस्करण का विश्वसनीय प्रतिकृति है। ई-इंडिया में पाठक अनुकूल कई विशेषताएं है, जैसे हाईपरलिंक, हाईलाइटिंग, बुकमार्किंग तथा इंटरएक्टिविटी।

Top 10 Hindi News:केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया
Top 10 Hindi News: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया

 इस पुस्तक का मूल्य 300 रूपये होगा और ई-बुक 225 रूपये में उपलब्ध होगी। यह पुस्तक 20 फरवरी 2020 से निम्मलिखित लिंक पर प्रकाशन प्रभाव की वेबसाइट से ऑनलाइन खरीदी जा सकती है।

पुस्तकें अमेजन और गूगल प्ले स्टोर से भी खरीदी जा सकती है।

किताब के बारे में जानकारी

 द रिफरेंस एनुअल – इंडिया/ भारत – 2020 में  वर्ष के दौरान भारत और इसके विभिन्न सरकारी मंत्रालयों/विभागों/संगठनों की गतिविधियों  प्रगति और उपलब्धियों के बारे में विस्तृत और व्यापक जानकारी उपलब्ध है। यह संकलन का 64 वां संस्करण है।

Top 5 HindiNews: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया
केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया

इंडिया/भारत 2020 को  सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन प्रभाग और न्यू मीडिया विंग द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया गया है। यह विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं के इच्छुक प्रतियोगियों के लिए एक बहुप्रतीक्षित वार्षिक प्रकाशन है। इस पुस्तक में ग्रामीण से शहरी, उद्योग से विज्ञान और प्रौद्योगिकी से मानव संसाधन विकास तक देश के विकास के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। यह संग्रह वर्ष के दौरान  सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों तथा महत्वपूर्ण घटनाओं की झलक देता है। वर्षों के दौरान इसने  शोधकर्ताओं, योजनाकारों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, मीडिया पेशेवरों में एक अच्छी जगह बनाने का गौरव हासिल किया है।

प्रकाशन विभाग राष्ट्रीय महत्व के विषयों, भारत की समृद्ध संस्कृति और साहित्यिक विरासत को दर्शाती पुस्तकों और पत्रिकाओं का संग्राहक है। 40 के दशक में अपनी स्थापना के बाद से प्रकाशन विभाग अंग्रेजी और हिन्दी के साथ-साथ सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में किफायती मूल्य पर पुस्तकों का प्रकाशन कर रहा है।

Top 5 HindiNews: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया
Top 5 HindiNews: केन्द्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इंडिया/भारत 2020 का लोकार्पण किया

पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशन विभाग ने साहित्य एवं साहित्यिक हस्तियों के साथ-साथ विभिन्न विषयों पर गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन किया है। ऐसी पुस्तकें संग्रह में ताजगी लाने के अलावा इसे पठनीय और प्रासंगिकता की बाधाओं से मुक्त बनाती हैं।

प्रकाशन प्रभाग में 2000 से अधिक डिजिटल पुस्तकें हैं। वर्तमान में डिजिटल अभिलेखागार में 2185 से अधिक पुस्तकों का भंडार है। इनमें से 405 ई-पुस्तकों को अमेजन और गूगल प्ले जैसे विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से बिक्री के लिए रखा गया था। ई-पुस्तकों की 35,000 से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। इसके अलावा डीपीडी ने विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर पुस्तकों की संख्या बढ़ाते हुए 370 से अधिक कर डिजिटल प्रकाशन पर अपनी उपस्थिति का विस्तार किया।

Top 4 Hindi News : कैबिनेट ने सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक, 2020 को मंजूरी दी

महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक उपाय किये गये हैं

Top 3 Hindi News : प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में महिलाओं के कल्‍याण के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक ‘सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक 2020’ को मंजूरी दे दी है। संसद में ‘सरोगेसी नियमन विधेयक 2020’ को पेश करने और  ‘चिकित्‍सा गर्भपात संशोधन विधेयक 2020’ को मंजूरी देने के बाद यह अहम कदम उठाया गया है। ये विधायी उपाय महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम हैं।

      संसद में पारित हो जाने एवं इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद केन्‍द्र सरकार इस अधिनियम पर अमल की तिथि को अधिसूचित करेगी। इसके बाद राष्‍ट्रीय बोर्ड का गठन किया जाएगा।

      राष्‍ट्रीय बोर्ड भौतिक अवसंरचना, प्रयोगशाला एवं नैदानिक उपकरणों तथा क्लिनिकों एवं बैंकों में रखे जाने वाले विशेषज्ञों के लिए न्‍यूनतम मानक तय करने के लिए आचार संहिता निर्धारित करेगा, जिसका पालन क्लिनिक में काम करने वाले लोगों को करना होगा।      केन्‍द्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के तीन महीनों के भीतर राज्‍य एवं केन्‍द्र शासित प्रदेश इसके लिए राज्‍य बोर्डों और राज्‍य प्राधिकरणों का गठन करेंगे।

      राज्‍य बोर्ड पर संबंधित राज्‍य में क्लिनिकों एवं बैंकों के लिए राष्‍ट्रीय बोर्ड द्वारा निर्धारित नीतियों एवं योजनाओं को लागू करने की जिम्‍मेदारी होगी।

      विधेयक में केन्‍द्रीय डेटाबेस के रख-रखाव तथा राष्‍ट्रीय बोर्ड के कामकाज में उसकी सहायता के लिए राष्‍ट्रीय रजिस्‍ट्री एवं पंजीकरण प्राधिकरण का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक में उन लोगों के लिए कठोर दंड का भी प्रस्‍ताव किया गया है, जो लिंग जांच, मानव भ्रूण अथवा जननकोष की बिक्री का काम करते हैं और इस तरह के गैर-कानूनी कार्यों के लिए एजेंसियां/गोरखधंधा/संगठन चलाते हैं।

 लाभ

इस कानून का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह देश में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी सेवाओं का नियमन करेगा। अत: यह कानून बांझ दम्‍पत्तियों में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) के तहत नैतिक तौर-तरीकों को अपनाए जाने के संबंध में कहीं अधिक भरोसा पैदा करेगा।

पृष्‍ठभूमि

      ‘सहायक प्रजनन तकनीक नियमन विधेयक 2020’ महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की रक्षा एवं संरक्षण के लिए केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए अनेक कानूनों की श्रृंखला में नवीनतम कदम है। देश में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी सेवाओं में सुरक्षित एवं नैतिक तौर-तरीकों को अपनाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। इस विधेयक के जरिए राष्‍ट्रीय बोर्ड, राज्‍य बोर्ड, नेशनल रजिस्‍ट्री और राज्‍य पंजीकरण प्राधिकरण सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी से जुड़े क्लिनिकों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी बैंकों का नियमन एवं निगरानी करेंगे।

      पिछले कुछ वर्षों के दौरान सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। एआरटी केन्‍द्रों और हर साल होने वाले एआरटी चक्रों की संख्‍या में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले देशों में भारत भी शामिल है। वैसे तो इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक ने बांझपन के शिकार तमाम लोगों में नई उम्‍मीदें जगा दी हैं, लेकिन इससे जुड़े कई कानूनी, नैतिक और सामाजिक मुद्दे भी सामने आए हैं। इस वैश्विक प्रजनन उद्योग के प्रमुख केन्‍द्रों में अब भारत भी शामिल हो गया है। यही नहीं, प्रजनन चिकित्‍सा पर्यटन का भी चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में इससे संबंधित क्लिनिक अब जननकोश दान करना, अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई), आईवीएफ, आईसीएसआई, पीजीडी और गर्भकालीन सरोगेसी जैसी लगभग सभी तरह की एआरटी सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। हालांकि, भारत में इस तरह की अनेक सेवाएं मुहैया कराने के बावजूद संबंधित प्रोटोकॉल का अब तक कोई मानकीकरण नहीं हो पाया है और इस बारे में सूचनाएं देने का चलन अब भी काफी हद तक अपर्याप्‍त है।

      सहायक प्रजनन तकनीक सेवाओं के नियमन का मुख्‍य उद्देश्‍य संबंधित महिलाओं एवं बच्‍चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करना है। डिम्बाणुजन कोशिका दाता को बीमा कवर मुहैया कराने एवं कई भ्रूण आरोपण से संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है और इसके साथ ही सहायक प्रजनन तकनीक से जन्‍म लेने वाले बच्‍चों को किसी जैविक बच्‍चे की भांति ही समान अधिकार देने की आवश्‍यकता है। एआरटी बैंकों द्वारा किये जाने वाले शुक्राणु, डिम्बाणुजन कोशिका और भ्रूण के निम्नताप परिरक्षण का नियमन करने की जरूरत है और इस विधेयक का उद्देश्‍य सहायक प्रजनन तकनीक के जरिए जन्‍म लेने वाले बच्‍चे के हित में आनुवांशिक पूर्व आरोपण परीक्षण को अनिवार्य बनाना है।

सरोगेसी नियमन विधेयक 2020

      सरोगेसी (नियमन) विधेयक 2020 में केन्‍द्रीय स्‍तर पर राष्‍ट्रीय बोर्ड और राज्‍यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों में राज्‍य बोर्डों तथा उपयुक्‍त प्राधिकरणों के गठन के जरिए भारत में सरोगेसी का नियमन करने का प्रस्‍ताव किया गया है। इस विधेयक पर प्रवर समिति ने गौर कर लिया है तथा संबंधित रिपोर्ट 5 फरवरी, 2020 को राज्‍यसभा में पेश कर दी गई है।

      इस अधिनियम का मुख्‍य लाभ यह होगा कि यह देश में सरोगेसी सेवाओं का नियमन करेगा। वैसे तो मानव भ्रूण एवं जननकोश की खरीद-बिक्री सहित वाणिज्यिक सरोगेसी को प्रतिबंधित किया जाएगा, लेकिन भारतीय विवाहित जोड़ों, भारतीय मूल के विवाहित जोड़ों और भारतीय अविवाहित महिला यानी सिंगल वुमन (केवल विधवा अथवा तलाकशुदा) को नैतिक सरोगेसी की अनुमति निर्दिष्‍ट शर्तों को पूरा करने पर ही दी जाएगी। इस प्रकार यह अनैतिक तौर-तरीकों को नियंत्रित करेगा, सरोगेसी के वाणिज्‍यीकरण की रोकथाम करेगा और सरोगेट माताओं तथा सरोगेसी के जरिए जन्‍म लेने वाले बच्‍चों के संभावित शोषण को रोकेगा।

चिकित्‍सा गर्भपात संशोधन विधेयक 2020

      चिकित्‍सा गर्भपात अधिनियम, 1971 (1971 का 34) को कानून का रूप इसलिए दिया गया, ताकि पंजीकृत डॉक्‍टरों द्वारा निर्दिष्‍ट गर्भपात किये जाने का मार्ग प्रशस्‍त किया जा सके। इसके तहत संबंधित मुद्दों और घटनाओं को भी ध्‍यान में रखा गया। इस अधिनियम में उन महिलाओं के लिए सुरक्षित, किफायती एवं सुगम्‍य गर्भपात सेवाओं को मान्‍यता दी गई, जिन्‍हें निर्दिष्‍ट स्थितियों में गर्भपात कराने की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा कई रिट याचिकाएं उच्‍चतम न्‍यायालय और विभिन्‍न उच्‍च न्‍यायालयों में दाखिल की गई हैं, जिनमें महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के कारण भ्रूण में असामान्यता या गर्भधारण के आधार पर वर्तमान स्‍वीकार्य सीमा के बाद भी गर्भावधि में गर्भपात की अनुमति देने की मांग की गई है।

      कुल मिलाकर, इन तीनों प्रस्‍तावित कानूनों ने बदलते सामाजिक संदर्भों और तकनीक की दिशा में हुई प्रगति से जुड़े मुद्दों को सुलझाते हुए महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के संरक्षण का माहौल बनाया है।  

Top 2 Hindi News : मंत्रिमंडल ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-दो को मंजूरी दी

  Top 2 Hindi News : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम (जी)] के दूसरे चरण को 2024-25 तक के लिए मंजूरी दे दी है। इसमें खुले में शौच से मुक्ति के बाद सार्वजनिक शौचालयों में बेहतर सुविधाओं (ओडीएफ प्लस) पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा जिसमें खुले में शौच मुक्त अभियान को जारी रखना और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) भी शामिल होगा।

इस कार्यक्रम में यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया जायेगा कि एक व्यक्ति भी न छूटे और हर व्यक्ति शौचालय का इस्तेमाल करे। एसबीएम (जी) चरण- दो को मिशन की भांति क्रियान्वित करने लिए कुल अनुमानित बजट 2020-21 से 2024-25 की अवधि के लिए 52,497 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें केन्द्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी है। इसके अलावा, 15वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा ग्रामीण जलापूर्ति और स्वच्छता के क्रियान्वयन के लिए 30,375 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। ओडीएफ प्लस कार्यक्रम मनेरगा के साथ सम्मिलित होगा, विशेषकर धूसर जल प्रबंधन और नये जल जीवन मिशन कार्यक्रम को भी पूरा करेगा।        

इस कार्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा मानदंडों के अनुसार नये पात्र घरों को 12,000 रुपये की राशि प्रदान करने का प्रावधान जारी रहेगा। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) के लिए वित्त पोषण मानदंडों को युक्तिसंगत बनाया गया है और घरों की संख्या को प्रति व्यक्ति आय से बदल दिया गया है। इसके अलावा, ग्राम पंचायतों (जीपी) को ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक स्वच्छता परिसर के निर्माण (सीएमएससी) के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 2 लाख से 3 लाख रुपये कर दिया गया है।

इस कार्यक्रम को परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों/संघ शासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा, जो शीघ्र ही राज्यों को जारी किए जाएंगे। केन्द्र और राज्यों के बीच सभी घटकों के लिए  फंड शेयरिंग का ढांचा पूर्वोत्तर राज्यों एवं हिमालयी राज्यों और जम्मू एवं कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के बीच 90:10, अन्य राज्यों के बीच 60:40 और अन्य केन्द्र शासित प्रदेश के बीच 100:0 होगा।

ओडीएफ प्लस के एसएलडब्ल्यूएम घटक की निगरानी चार प्रमुख क्षेत्रों के आउटपुट-आउटकम संकेतकों के आधार पर की जाएगी: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, जैव अपघटित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (जिसमें पशु अपशिष्ट प्रबंधन शामिल है), धूसर जल प्रबंधन और मलयुक्त कीचड़ प्रबंधन।

एसबीएम-जी का दूसरा चरण रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को घरेलू शौचालय एवं सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से प्रोत्साहन देना जारी रखेगा। साथ ही एसएलडब्ल्यूएम के लिए बुनियादी ढांचे जैसे कि खाद के गड्ढे, सोखने वाले गड्ढे, अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब, शोधन संयंत्र आदि।

देश में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 2 अक्टूबर 2014 को एसबीएम (जी) की शुरुआत के समय 38.7 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस मिशन के शुरू होने से 10 करोड़ से ज्यादा व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया, परिमाणस्वरूप सभी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों ने स्वयं को 2 अक्टूबर 2019 को ओडीएफ घोषित किया। हालांकि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने सभी राज्यों को यह सलाह दी है कि वे इस बात की पुनः पुष्टि कर लें कि ऐसा कोई ग्रामीण घर न हो, जो शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहा हो और यह सुनिश्चित करने के दौरान अगर ऐसे किसी घर की पहचान होती है तो उसको व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के निर्माण के लिए जरूरी सहायता प्रदान की जाये ताकि इस कार्यक्रम के अंतर्गत कोई भी पीछे न छूटे।

Top 1 Hindi News: सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 के परिणाम

Top 10 Hindi News : संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 19 जनवरी, 2020 को आयोजित सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 के आधार पर, निम्नलिखित अनुक्रमांक वाले उम्मीदवारों ने सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रधान) परीक्षा, 2020 के लिए अर्हता प्राप्त कर ली है। यह परिणाम, संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट https://upsc.gov.in पर भी उपलब्ध है।  

परीक्षा के प्रत्येक चरण में इन सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी इनके द्वारा, निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा किए जाने के अध्यधीन पूर्णतया अनंतिम है। अर्हक घोषित किए गए उम्मीदवारों को 27 तथा 28 जून, 2020 को आयोजित की जाने वाली सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रधान) परीक्षा, 2020 में भाग लेना होगा। अर्हक उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे खान मंत्रालय द्वारा जारी सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक परीक्षा, 2020 की नियमावली तथा आयोग द्वारा जारी परीक्षा नोटिस सं. 02/ 2020-जियो., दिनांक 25.09.2019 का अवलोकन करें, जो आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उम्‍मीदवार अपने ई-प्रवेश पत्र, सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रधान) परीक्षा, 2020 के प्रारंभ होने से लगभग 3 सप्ताह पूर्व आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। उम्मीदवारों को यह भी सूचित किया जाता है कि सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 से संबंधित अंक तथा कट ऑफ अंक, सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक परीक्षा, 2020 की संपूर्ण प्रक्रिया के पूरा होने अर्थात् सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक परीक्षा, 2020 के अंतिम परिणाम की घोषणा के उपरांत ही आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। किसी भी परिस्थिति में, सम्‍म‍िलित भूवैज्ञानिक (प्रधान) परीक्षा, 2020 के लिए केंद्र/विषय में परिवर्तन के किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।

संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में एक सुविधा काउंटर स्थित है। उम्मीदवार अपनी परीक्षा/परिणाम से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी/स्पष्‍टीकरण इस काउंटर से व्यक्तिगत रूप से अथवा टेलीफोन नं. (011) 23388088/ 23385271/ 23381125/ 23098543 पर कार्य दिवसों में प्रात: 10.00 से सायं 5.00 बजे के बीच प्राप्त कर सकते हैं।

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Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी
Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी
Top 10 Hindi News: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत माता की महान संतानों में एक, साहस, करुणा तथा सुशासन के प्रतिमान असाधारण छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनका जीवन लाखों लोगों को प्रेरित करता है। ’शिवाजी महाराज ने शौर्यपूर्ण योद्धा और महान प्रशासक के रूप में अपनी छवि बनाई। मजबूत नौसेना बनाने से लेकर अनेक जनमुखी नीतियां लागू करने के साथ वह सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट थे। उन्हें अन्याय और धमकी का प्रतिकार करने के लिए हमेशा जाना जाएगा।महान छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या जयंती दिनी त्यांना नमन!
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